नगर निगम के चुनाव कांग्रेस पूरी तैयारी के साथ और चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी
पार्टी की चंडीगढ़ में आयोजित बैठक में फैसला

HPCC : हरियाणा प्रदेश कांग्रेस ने फैसला किया है कि आने वाले स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी नगर निगम के चुनाव पार्टी के सिंबल पर लड़ेगी। पार्टी ने 10 जनवरी से लेकर 25 फरवरी तक प्रदेश में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ चलाने का भी फैसला किया है।
आज चंडीगढ़ में हुई बैठक में हरियाणा प्रभारी बी.के हरिप्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला, लोकसभा सांसद श्री दीपेंद्र हुड्डा एवं अन्य वरिष्ठ नेतागण मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने की।
बैठक के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि आज की बैठक का मुख्य उद्देश्य नगर निगम चुनाव को लेकर रणनीति बनाना और केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना में किए गए परिवर्तनों का विरोध करना और राज्य भर में भविष्य के प्रदर्शनों की योजना बनाना था।
हरियाणा भर में “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान को तेज करने के लिए एक व्यापक योजना बनाई गई। इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने के लिए 10 जनवरी को जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। 11 जनवरी को एक दिवसीय प्रतीकात्मक उपवास (विरोध प्रदर्शन) निर्धारित है। 12 से 19 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिसमें सभी ग्राम पंचायतों में बैठकें शामिल हैं, ताकि लोगों को नए कानून के प्रभाव के बारे में सूचित किया जा सके। 7 से 15 फरवरी तक विधानसभा का राज्य स्तरीय घेराव (विरोध प्रदर्शन/घेराबंदी) निर्धारित है। एआईसीसी की क्षेत्रीय रैलियां 16 से 25 फरवरी तक निर्धारित हैं।
उन्होंने बताया कि पार्टी ने फैसला किया है कि नगर निगम के चुनाव पार्टी पूरी तैयारी के साथ लड़ेगी तथा जनता के मूलभूत मुद्दों को पूर्व और प्रभावित तरीके से उठाएगी। उन्होंने कहा कि बैठक में सभी पदाधिकारी को सक्रिय भूमिका निभाने की निर्देश दिए गए हैं। पार्टी पंचकुला, अंबाला और सोनीपत नगर निगम के चुनाव अपने चुनाव चिन्ह पर लड़ेगी लेकिन बाकी नगर पालिका और नगर परिषद के चुनाव को लेकर पार्टी उसी समय रणनीति तैयार करेगी।

उन्होंने कहा कि मनरेगा को लेकर जो नया कानून बनाया जा रहा है वह कानून नहीं है बल्कि विधेयक है और इसमें गारंटी जैसा कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले के कानून और वर्तमान विधेयक के अंतर को समझाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस आंदोलन को इस तरीके से चलाएगी ताकि लोगों को पता चल सके कि इस नए विधेयक से कितना नुकसान होगा। कांग्रेस के आंदोलन से सरकार पर विधेयक वापस लेने का दबाव बनेगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस विधेयक का पुरजोर ढंग से विरोध किया था लेकिन भाजपा ने बहुमत के आधार पर इसे पास करवा लिया।